Research Article | Open Access
भक्तिकालीन साहित्य का सामाक्िक और धार्मिक प्रभाव
Kiran Bala Patel,Yogesh Kumar Sahu
Pages: 576-579
Abstract
भक्तिकालीन साहित्य ने भारिीय समाि और धमि पर गिरा प्रभाव डाला िै। इस साहिक्त्यक आंदोलन ने िातिगि भेदभाव और सामाक्िक असमानिा का ववरोध करिे िुए समिामूलक समाि की स्थापना की हदशा में मित्वपूर्ि प्रयास ककए। महिला सशक्तिकरर्, सामुदातयक एकिा, और धार्मिक सहिष्र्ुिा के संदेश के माध्यम से इसने समाि में व्यापक पररवििन लाए। संि कबीर, मीराबाई, सूरदास, और िुलसीदास िैसे प्रमुख भति कववयों ने अपने काव्य में धार्मिक और सामाक्िक सुधार के ववचारों को प्रसाररि ककया। इस साहिक्त्यक आंदोलन ने धार्मिक धारर्ाओं में व्यक्तिगि अनुभव और सादगी का मित्व बिाया। यि अध्ययन भक्तिकालीन साहित्य के सामाक्िक और धार्मिक प्रभावों का ववश्लेषर् करिा िै और इसके प्रमुख कववयों के योगदान को उिागर करिा िै।
Keywords
भक्तिकालीन साहित्य, सामाक्िक प्रभाव, धार्मिक प्रभाव, िातिगि भेदभाव, महिला सशक्तिकरर्, सामुदातयक एकिा, धार्मिक सहिष्र्ुिा, संि कबीर, मीराबाई, सूरदास, िुलसीदास, धार्मिक सुधार, सामाक्िक सुधार।